रुद्राभिषेक पूजा कब होती है? जानिए शुभ मुहूर्त और खर्च
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक पूजा सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। परंतु रुद्राभिषेक कब कराना चाहिए, इसका सही समय और मुहूर्त क्या हैं, यह जानना बहुत ज़रूरी है। रुद्राभिषेक पूजा न केवल एक धार्मिक विधि है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का दिव्य माध्यम है। यह पूजा ना केवल रोगों और संकटों से मुक्ति दिलाती है, बल्कि जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर देती है।
उज्जैन में रुद्राभिषेक पूजा कब और क्यों की जाती है?

रुद्राभिषेक पूजा के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष समय और अवसर बताए गए हैं। नीचे उन प्रमुख अवसरों और परिस्थितियों का वर्णन किया गया है, जब रुद्राभिषेक पूजा उज्जैन में करना सबसे उत्तम माना जाता है:
1. सावन महीने में
श्रावण मास भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है। इस महीने में रुद्राभिषेक पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस महीने भगवान शिव की आराधना करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है और मनचाहा फल प्राप्त होता है। इन दिनों अभिषेक अवश्य कराएं:
- श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को।
- श्रावण पूर्णिमा या रक्षा बंधन के दिन।
- सावन के अंतिम सोमवार को।
लाभ: यह समय स्वास्थ्य सुधार, आध्यात्मिक उन्नति, और पारिवारिक सुख-शांति के लिए अत्यंत शुभ है।
2. महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का पवित्र पर्व है। इस दिन रुद्राभिषेक पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने का यह अवसर न गवाए।
- महाशिवरात्रि की रात, विशेष रूप से चार प्रहरों में।
- दिन के शुभ मुहूर्त में।
लाभ: यह पूजा गंभीर रोगों से मुक्ति, ग्रह दोष निवारण, और आत्मिक शांति के लिए प्रभावी है।
3. प्रदोष तिथि पर
प्रदोष तिथि (त्रयोदशी) भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन रुद्राभिषेक पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन रुद्रभिषेक पूजा कराना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। यह पूजा:
- प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि, विशेष रूप से सोम प्रदोष को कराना चाहिए।
- सूर्यास्त के समय या प्रदोष काल में।
लाभ: यह समय बाधा निवारण, पारिवारिक समस्याओं के समाधान, और सकारात्मक ऊर्जा के लिए विशेष महत्वपूर्ण है।
4. गंभीर बीमारी या संकट के समय
रुद्राभिषेक पूजा गंभीर बीमारियों, असाध्य रोगों, या जीवन के संकटों में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है। जब कोई गंभीर रोग से जूझ रहा हो, या किसी की दीर्घायु की कामना करनी हो, तब यह चमत्कारिक पूजा विशेष रूप से लाभदायक होती है।
- जब कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो।
- किसी दुर्घटना या संकट के समय।
- शल्य चिकित्सा (सर्जरी) से पहले या बाद में।
लाभ: यह पूजा मृत्यु के भय को दूर करती है और स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है।
5. जन्मदिन या विशेष अवसरों पर
जन्मदिन, विवाह, या अन्य शुभ अवसरों पर रुद्राभिषेक पूजा करने से दीर्घायु, सुख, और समृद्धि की प्राप्ति होती है। अगर आप अपने जीवन की किसी नई शुरुआत को शुभ बनाना चाहते हैं, तो रुद्राभिषेक कराना अत्यंत फलदायी होता है।
- जन्मदिन की सुबह या शुभ मुहूर्त में।
- नए कार्य की शुरुआत, जैसे गृह प्रवेश या व्यवसाय शुरू करने के समय।
लाभ: यह पूजा जीवन में सकारात्मकता और सफलता लाती है।
6. ग्रह दोष निवारण के लिए
कुंडली में राहु, केतु, शनि, या मंगल जैसे ग्रहों के दोष होने पर रुद्राभिषेक पूजा विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है। राहु, केतु, शनि जैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव या कुंडली में कालसर्प या पितृ दोष हो, तो रुद्राभिषेक से उन दोषो का निवारण किया जा सकता है।
- ज्योतिषी की सलाह पर शुभ मुहूर्त में।
- शनिवार, अमावस्या, या ग्रहण के समय, यदि ग्रह दोष अधिक प्रभावी हों।
लाभ: यह पूजा ग्रह दोषों को शांत करती है और जीवन में स्थिरता लाती है।
7. सामूहिक कल्याण के लिए
सामूहिक रुद्राभिषेक पूजा सामुदायिक कल्याण, प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा, और सामाजिक शांति के लिए की जाती है।
- किसी सामुदायिक संकट या आपदा के समय।
- मंदिरों या पवित्र स्थानों पर विशेष आयोजनों के दौरान।
लाभ: यह पूजा सामूहिक ऊर्जा को बढ़ाती है और सकारात्मक वातावरण बनाती है।
उज्जैन में रुद्राभिषेक पूजा की विधि क्या है?
रुद्राभिषेक पूजा को निम्नलिखित तरीके से किया जा सकता है:
- शुद्धिकरण: स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- शिवलिंग स्थापना: शिवलिंग या भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करें।
- पूजा सामग्री: जल, दूध, दही, शहद, घी, बिल्वपत्र, चंदन, फूल, और धूप तैयार करें।
- मंत्र जाप: रुद्राक्ष माला से रुद्र सूक्त, महामृत्युंजय मंत्र, या शिव तांडव स्तोत्र का जाप करें। सामान्यतः 108 या 1008 बार जाप किया जाता है।
- अभिषेक: शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, और अन्य सामग्रियों से अभिषेक करें।
- हवन (वैकल्पिक): पंडित की देखरेख में हवन करें और प्रत्येक मंत्र के साथ “स्वाहा” कहकर आहुति दें।
- आरती और दान: पूजा के अंत में शिव आरती करें और जरूरतमंदों को दान दें।
उज्जैन में रुद्राभिषेक के लिए श्रेष्ठ दिन और मुहूर्त
- सोमवार: शिव जी का प्रिय दिन
- प्रदोष काल: त्रयोदशी तिथि की संध्या बेला
- सावन मास: शिव पूजन के लिए अत्यंत पवित्र माह
- अमावस्या/पूर्णिमा: विशेष फल देने वाला योग
- ज्योतिषीय सलाह से निकाला गया मुहूर्त भी श्रेष्ठ होता है
उज्जैन में रुद्राभिषेक पूजा करने से क्या लाभ मिलते है?
- स्वास्थ्य और दीर्घायु: यह पूजा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है।
- नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: घर और मन से नकारात्मकता दूर होती है।
- ग्रह दोष निवारण: कुंडली के दोषों को शांत करने में प्रभावी।
- सुख-समृद्धि: जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि की प्राप्ति।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह पूजा आत्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है।
उज्जैन में ही क्यों कराएं रुद्राभिषेक?
उज्जैन, भगवान महाकाल की नगरी, शिव पूजा का सर्वोत्तम स्थल माना गया है। यहां रुद्राभिषेक कराने से विशेष पुण्य और शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
- अनुभवी पंडितों द्वारा वैदिक विधि से पूजा
- महाकाल मंदिर के पास रुद्राभिषेक की व्यवस्था
- ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग
- वीडियो रिकॉर्डिंग और रिपोर्टिंग सुविधा
उज्जैन में रुद्राभिषेक में कितना समय लगता है?
रुद्राभिषेक में लगने वाला समय पूजा के प्रकार पर निर्भर करता है। जैसे:
- लघु रुद्राभिषेक: इस पूजा में लगने वाला समय: लगभग 1 से 2 घंटे
- महा रुद्राभिषेक: इस पूजा में लगने वाला समय: लगभग 5 से 7 घंटे
- अति रुद्राभिषेक: इस पूजा में लगने वाला समय: 11 दिन तक प्रतिदिन कई घंटे
रुद्राभिषेक पूजा का खर्च कितना होता है?
उज्जैन में रुद्राभिषेक पूजा का खर्च पूजा के प्रकार और विधान पर निर्भर करता है:
| रुद्राभिषेक प्रकार | अनुमानित खर्च (INR) |
|---|---|
| लघु रुद्राभिषेक | ₹2,100 – ₹2,500 |
| महा रुद्राभिषेक | ₹3,000 – ₹5,000 |
| अति रुद्र | ₹5,000+ (11 दिनों का आयोजन) |
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Call: +91-9644451903





